'चंदन पलना रेशम डोरी, मन मुदित मातु गाये लोरी..'

रामलला सरकार को रागों से रिझा रहे हैं संगीत मर्मज्ञ

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कोंच। प्रथम स्वातंत्र्य समर का मूक साक्षी रानी झांसी का गुरूद्वारा कोंच का रामलला मंदिर आजकल पक्के संगीत की तानों से सराबोर हो रहा है। यहां जारी झूलनोत्सव में शाम से ही राग रागिनियां रामलला मंदिर के प्रांगण में उतर कर भगवान रामलला सरकार को रिझाने के जतन में लग जाती हैं। संगीत की शास्त्रीय बिधा के जानकारों के अलावा भजन गायक भी यहां संगीत का ऐसा रस बिखेर रहे हैं कि बरबस ही श्रोता समुदाय भाव विभोर हो उठते हैं।

मंदिर के एकादश गद्दीधर महंत रघुनाथदास के सानिध्य में यहां रामलला मंदिर में झूलनोत्सव में बीती शाम शास्त्रीय संगीत की ऐसी तान छिड़ी कि श्रोता समुदाय आनंद के सागर में डूबते उतराते दिखे। कु. हर्षिता त्रिपाठी ने राग वागेश्वरी तीन ताल में 'कौन भरत तोरी बिनती पियर मानो न मानो हमारी बात..' गाकर पक्के संगीत पर अपनी उम्दा पकड़ का प्रदर्शन किया। जानेमाने रंगकर्मी व गायक नरोत्तम स्वर्णकार ने राग दरबारी में गाया, 'मुरली मनोहर गोपाला, गोविंद राधे गोपाला..'। शिवशंकर त्रिपाठी ने सुदर सा झूला गीत 'चंदन पलना रेशम डोरी, मन मुदित मातु गाये लोरी..' सुना कर सभी को आनंदित कर दिया। नीहारिका मिश्रा ने राग मास विहाग में गाया, 'जागूं मैं सारी रैना बलम..'। पूजा दुवे ने राग यमन तीन ताल में अपनी प्रस्तुति 'मोरी गगरी न भरन देत रे बहियां पकर मोरी करत रार..' पर खूब तालियां बटोरीं। निशा झा की प्रस्तुति 'चारों धामों से निराला ब्रज धाम कि दर्शन कर लो जी..' लाजबाब रही।


देशराज ने राग बहार तीन ताल में 'झूलन की ऋतु आ गई गुमानी सावन सरस सुहागिनी के सुख..' तथा राग भीम पलासी झपताल में 'झूलना झूलन आये मुरलीधर संग आली झूमत झांकत प्रिय छवि निरखत..' गाया। हरीश याज्ञिक ने राग यमन ध्रुपद चार ताल में अपनी प्रस्तुति 'वेद रटत ब्रह्म रटत शेष रटत शंभु रटत नारद मुनि व्यास..' दी। सोनू सोनी ने राग यमन ध्रुपद में गाया, 'विनती करत तोरे द्वारकृपा करियो मोपै कृपालु..'। कु. देवयानी, वीरेन्द्र त्रिपाठी, अमन सोनी, अजमेरसिंह आदि की प्रस्तुतियां भी लाजबाब रहीं। संचालन रामकृष्णसिंह परिहार ने किया। हारमोनियम पर प्रमोद बब्बा, हरीश याज्ञिक तथा तबले पर महेश व मथुराप्रसाद संगत कर रहे थे। महंत रघुनाथदास ने भक्तों को आशीर्वाद दिया।

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