रेखा की अनकही बातें।सेलिब्रिटी बर्थडे विशेष

तस्वीर साभार: : YouTube




वेट्रन एक्ट्रेस रेखा आज (10 अक्टूबर) अपना 64वां बर्थडे मना रह हैं। रेखा ऑनस्क्रीन के अलावा अपनी पर्सनल लाइफ के लिए भी चर्चाओं में रही हैं। अमिताभ बच्चन और रेखा का अफेयर बॉलीवुड के सबसे चर्चित अफेयर में से एक है।





रेखा जिसे रहस्यों की रेखा कहना गलत न होगा। वजह यह है कि रेखा हमेशा से एक रहस्यमयी शख्सियत रही   हैं जिनके बारे में जितनी भी बातें की जाएं कम हैं। हालांकि खुद रेखा ने ही अपने तमाम इंटरव्यू में उन तमाम सवालों के बेबाकी से जवाब दिए हैं जिनके बारे में लोग हमेशा से जानना चाहते हैं। 





यही वजह थी कि लेखक यासिर उस्मान ने रेखा से जुड़े तमाम पहलुओं को 'रेखा एक अनकही कहानी' किताब में कलमबंद करने का फैसला किया।विनोद अनुपम ने रेखा पर संवाद करते हुए लेखक से पूछा कि रेखा को किताब के लिए चुनने की प्रमुख वजह क्या रही? इस पर यासिर ने कहा कि उन्हें ग्लैमर के लिए जाना जाता है। हकीकत यह है कि वह बहुत अकेली हैं। महज 13 वर्ष की उम्र में किताबें छोड़ मुंबई आकर फिल्मों में काम करना पड़ा। यहां तक कि वह ङ्क्षहदी तक नहीं जानती थीं। लेखक ने उनके अतीत में झांकने के लिए पुराने इंटरव्यू व उनके सह कलाकार व नजदीक रहे लोगों से बातचीत का सहारा लिया। 








यासिर के अनुसार उन्हें ज्यादा मदद मिली तो खुद रेखा द्वारा दिए गए 1969 से 1979 के बीच दिए गए इंटरव्यू से। वजह यह कि रेखा ने हर बात को फिर चाहे अमिताभ से उनके रिश्ते ही क्यों न हो हमेशा बेबाकी से बात रखी। अनुपम ने सवाल किया कि किताब में बतौर अभिनेत्री रेखा को कम छुआ गया है। इस पर यासिर ने बड़ी साफगोई से कहा कि वह उन्हें बेहतरीन विनोद अनुपम ने रेखा पर संवाद करते हुए लेखक से पूछा कि रेखा को किताब के लिए चुनने की प्रमुख वजह क्या रही? इस पर यासिर ने कहा कि उन्हें ग्लैमर के लिए जाना जाता है। हकीकत यह है कि वह बहुत अकेली हैं। महज 13 वर्ष की उम्र में किताबें छोड़ मुंबई आकर फिल्मों में काम करना पड़ा। यहां तक कि वह ङ्क्षहदी तक नहीं जानती थीं। लेखक ने उनके अतीत में झांकने के लिए पुराने इंटरव्यू व उनके सह कलाकार व नजदीक रहे लोगों से बातचीत का सहारा लिया। यासिर के अनुसार उन्हें ज्यादा मदद मिली तो खुद रेखा द्वारा दिए गए 1969 से 1979 के बीच दिए गए इंटरव्यू से। वजह यह कि रेखा ने हर बात को फिर चाहे अमिताभ से उनके रिश्ते ही क्यों न हो हमेशा बेबाकी से बात रखी। अनुपम ने सवाल किया कि किताब में बतौर अभिनेत्री रेखा को कम छुआ गया है। इस पर यासिर ने बड़ी साफगोई से कहा कि वह उन्हें बेहतरीन विनोद अनुपम ने रेखा पर संवाद करते हुए लेखक से पूछा कि रेखा को किताब के लिए चुनने की प्रमुख वजह क्या रही? इस पर यासिर ने कहा कि उन्हें ग्लैमर के लिए जाना जाता है। हकीकत यह है कि वह बहुत अकेली हैं। महज 13 वर्ष की उम्र में किताबें छोड़ मुंबई आकर फिल्मों में काम करना पड़ा। यहां तक कि वह ङ्क्षहदी तक नहीं जानती थीं। लेखक ने उनके अतीत में झांकने के लिए पुराने इंटरव्यू व उनके सह कलाकार व नजदीक रहे लोगों से बातचीत का सहारा लिया। यासिर के अनुसार उन्हें ज्यादा मदद मिली तो खुद रेखा द्वारा दिए गए 1969 से 1979 के बीच दिए गए इंटरव्यू से। वजह यह कि रेखा ने हर बात को फिर चाहे अमिताभ से उनके रिश्ते ही क्यों न हो हमेशा बेबाकी से बात रखी। अनुपम ने सवाल किया कि किताब में बतौर अभिनेत्री रेखा को कम छुआ गया है। इस पर यासिर ने बड़ी साफगोई से कहा कि वह उन्हें बेहतरीन विनोद अनुपम ने रेखा पर संवाद करते हुए लेखक से पूछा कि रेखा को किताब के लिए चुनने की प्रमुख वजह क्या रही? इस पर यासिर ने कहा कि उन्हें ग्लैमर के लिए जाना जाता है। हकीकत यह है कि वह बहुत अकेली हैं। महज 13 वर्ष की उम्र में किताबें छोड़ मुंबई आकर फिल्मों में काम करना पड़ा। यहां तक कि वह ङ्क्षहदी तक नहीं जानती थीं। लेखक ने उनके अतीत में झांकने के लिए पुराने इंटरव्यू व उनके सह कलाकार व नजदीक रहे लोगों से बातचीत का सहारा लिया। यासिर के अनुसार उन्हें ज्यादा मदद मिली तो खुद रेखा द्वारा दिए गए 1969 से 1979 के बीच दिए गए इंटरव्यू से। वजह यह कि रेखा ने हर बात को फिर चाहे अमिताभ से उनके रिश्ते ही क्यों न हो हमेशा बेबाकी से बात रखी। अनुपम ने सवाल किया कि किताब में बतौर अभिनेत्री रेखा को कम छुआ गया है। इस पर यासिर ने बड़ी साफगोई से कहा कि वह उन्हें बेहतरीन विनोद अनुपम ने रेखा पर संवाद करते हुए लेखक से पूछा कि रेखा को किताब के लिए चुनने की प्रमुख वजह क्या रही? इस पर यासिर ने कहा कि उन्हें ग्लैमर के लिए जाना जाता है। हकीकत यह है कि वह बहुत अकेली हैं। महज 13 वर्ष की उम्र में किताबें छोड़ मुंबई आकर फिल्मों में काम करना पड़ा। यहां तक कि वह ङ्क्षहदी तक नहीं जानती थीं। लेखक ने उनके अतीत में झांकने के लिए पुराने इंटरव्यू व उनके सह कलाकार व नजदीक रहे लोगों से बातचीत का सहारा लिया। यासिर के अनुसार उन्हें ज्यादा मदद मिली तो खुद रेखा द्वारा दिए गए 1969 से 1979 के बीच दिए गए इंटरव्यू से। वजह यह कि रेखा ने हर बात को फिर चाहे अमिताभ से उनके रिश्ते ही क्यों न हो हमेशा बेबाकी से बात रखी। अनुपम ने सवाल किया कि किताब में बतौर अभिनेत्री रेखा को कम छुआ गया

बॉलीवुड की ये रंगीन दुनिया ना जाने कितनी ही खूबसुरत लेकिन अधूरी प्रेम कहानियो की गवाह रही है। हालांकि इन अधूरी रही प्रेम कहानियो में ही कुछ लव स्टोरिज़ ऐसी भी रही हैं जो कि इतिहास के पन्नो में आज भी ज़िंदा है, या फिर यूं कहे कि अमर होकर रह गई हैं, ऐसी ही कहानियो में से एक रही है, बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन और सदाबहार अभिनेत्री रेखा की अनकही प्रेमकहानी।
गौर हो कि ये एक ऐसी कहानी रही है जिसके बारे में बातें अमूमन हर एक शख्स ने की, इस प्रेम कहानी से जुड़ी कई बातें अखबारो की सुर्खियां भी बनीं लेकिन जब कभी इन दोनो से इस रिश्ते पर सवाल पूछा गया, तो दोनो जवाब में बस चुप्पी साझ गए, इसे लेकर कभी कोई ज़िक्र इन दोनो की ओर से नही किया।
खैर आज भी, आज भी अगर किसी अवॉर्ड शो में अमिताभ और रेखा, दोनो साथ मौजूद हो, इनकी इस अधूरी रही प्रेम कहानी का, एक अनकहा सा सिलसिला बाकी मौजूद लोगो द्वारा महसूस किया जाता है।
ऐसे में वायरल हुआ रेखा का एक इंटरव्यू, इस इंटरव्यू में रेखा से जब पूछा गया सवाल अमिताभ को लेकर, रिपोर्ट्स की माने तो इसके जवाब में खुले तौर पर ये कह गई रेखा कि उनका अमिताभ से कभी कोई रिश्ता नहीं रहा, और इनके इसी लव अफेयर को लेकर जब रेखा से पूछा गया सवाल तो जवाब में ग़ालिब का एक शेर पढ़ते हुए कह गई रेखा ‘मोहब्बत में नहीं है फर्क जीने और मरने का, उसी को देख कर जीते हैं जिस काफिर पे दम निकले’





Rekha- the untold story”, रेखा- एक अनकही कहानी..
LGBT के लिए लड़ते समाज को उन “दूसरी औरतों” के लिए लड़ते देखना सुखद होगा, जो ये नहीं समझे कि उस भावना की तरह ये भी “प्राक्रतिक” है.
ये किताब एक ऐसे बहाव की तरह है, जिसमे एक बार गलती से भी अगर पैर पड़ गया तो फिर संभल तब ही पायेंगे जब आप अगले किनारे पर जा पहुंचेगे. उससे पहले संभलना, निकलना पाठक के बूते की बात नहीं. शायद वो बात इसी किताब के लिए कही गयी हो, कि आप यहाँ आयेंगे तो अपनी मर्ज़ी से, लेकिन जायेंगे हमारी मर्ज़ी से. और वो मर्ज़ी तब तक नहीं होगी, जब तक किताब का आखिरी पेज पढकर आप रेखा जैसे होने न होने की उधेड़बुन में उलझ न जाएँ.
पहले बात लेखक की हो जाये. एक मिस्ट्री को मिस्ट्री की तरह पेश करना एक कला है और इस कला में यासीर उस्मान पूरी तरह से माहिर हैं. इससे पहले मैं यासीर उस्मान की एक और किताब “राजेश खन्ना- द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ़ इंडिया’ज़ फर्स्ट सुपर स्टार” पढ़ चुकी हूँ”. किसी व्यक्ति की जीवनी लिखते वक़्त लेखक के कन्धों पर एक ज़िम्मेदारी होती है कि वो पाठक और चरित्र के बीच बस एक पुल का काम करे, न कि न्यायाधीश बनकर पाठक को चरित्र के विषय में अच्छा या बुरा समझाने लग जाये. रेखा के चरित्र को लेकर पूर्व स्थापित मानकों और भ्रामक विचारधाराओं से खुद को पूरी तरह अछूता रखते हुए यासीर उस्मान ने भानुरेखा को हमारे बीच रखा है, और मीडिया एवं बॉलीवुड द्वारा स्थापित रेखा तक खुद ही पहुँचने दिया है. इस किताब को पढने के बाद पूरे देश में रेखा की घर तोड़ने वाली औरत की तस्वीर धुंधली पड़ती जाएगी और संघर्ष करती हुई, शोषण से पार पाते हुए खुद, प्रेम की तलाश करती एक भावनात्मक तौर पर मजबूत औरत और सफल अभिनेत्री की छवि स्थापित हो जाएगी, ये कहना तो मुश्किल है लेकिन हाँ यासीर उस्मान वो शख्स होंगे जो रेखा के जीवन को पूरी तरह आपके हमारे बीच रखकर राय बनाने के लिए एक मंच दे चुके होंगे”.
“She started by being a starlet, she went on to being a star, she then became an actor, a genuine actor and then she became a diva.”
रेखा के लिए मुझे सहानुभूति नहीं होती, क्यूंकि अगर आप रेखा के लिए सहानुभूति महसूस करते हैं, तो आप सोने को आग में तपाने के लिए भी शर्मिंदा होंगे, बजाय उसके कुंदन बनने के हुनर को सराहने के. ऐसा करके आप रेखा को कम आंकने लगेंगे. हाँ 14 साल की भानुरेखा के लिए दुःख होता है, जिसे अपने परिवार को पालने के लिए कई लोगों की तीखी नज़रों और पैने इरादों के बीच से गुजरकर ज़ख़्मी होना पड़ा. पर एक सफल अभिनेत्री बनने के बाद भी व्यक्तिगत स्तर पर चली जद्दोजहद और लड़ाई रेखा ने खुद चुनी थी, जिसने उन्हें कभी कमज़ोर नहीं किया, बल्कि इसी जद्दोजहद ने उन्हें आज यहाँ तक ला छोड़ा है कि उनकी जिंदगी के महज़ २०० पन्ने पढने के लिए हम और आप 500 रुपए देने में शायद एक बार भी न सोचें.
इस किताब को पढने के बाद एक बात पर आप यकीन करने लगेंगे कि शादी के इतर भी कुछ सम्बन्ध किस हद तक किसी के जीवन में अहम् हो सकते हैं, कि उसकी पहचान हरेक रिश्तों से बड़ी हो जाये.
रेखा के फ़िल्मी करियर में उन्हें सब उतनी आसानी से नहीं मिला, जितना हम और आप सोचते या समझते हैं, और न ही सब उतना ही अचानक हुआ जैसे हम फिल्मों में देखते हैं. परदे के ऊपर हुआ अवतरण, रेखा की निजी जिंदगी में हुए बदलाव की छोटी सी झलक मात्र थी. जैसा कि दो दशक पहले तक रेखा के हरेक इंटरव्यू में सुना गया और फिल्मों एवं निजी जीवन में करीबियों ने किताब में कहा सुना है, ये किसी के लायक बनने से ज्यादा किसी के जैसे बन जाने की धुन थी.
वैसे बहुत कुछ तो पहले ही सबको पता था, लेकिन किताब पढने के बाद ये बात साफ़ हो जाती है रेखा फ़िल्मी करियर की तरह निजी जीवन में भी एक यात्रा पर थी, और ये यात्रा थी कोई ऐसा शख्स ढूँढने की, जो सिर्फ अपना हो, जो किसी के कह देने से रेखा को अपनी जिंदगी से बाहर न निकाल दे, बल्कि दुनिया में उसे अपने साथ उठने बैठने हंसने और जीने का मौका दे. फर्क सिर्फ इतना है कि अपने खून पसीने की एक एक बूँद देकर रेखा बॉलीवुड में तो फलक पर जा बैठी, लेकिन पूर्ण समर्पण के बाद भी निजी जीवन में वहीँ रह गयी जहाँ से शुरू हुई थी.
किताब में रेखा के बचपन से अगर कोई सार खोजा जाये तो ये कहना गलत नही होगा कि रेखा ने जिंदगी में सबसे अधिक अपने पिता की वजह से संघर्ष झेला. एक अविवाहित जोड़े की औलाद होने का तमगा लिए रेखा कभी ढकोसलों में कसे भारतीय समाज, भले वो बॉलीवुड जैसा अतिआधुनिक ही क्यों न हो, खुद को स्वीकार नहीं करवा पायी. विनोद मेहरा से लेकर किरण कुमार तक, कोई अपने परिवार के दवाब के आगे रेखा का हाथ नहीं थाम सका, और रेखा जहाँ से शुरू करती वहीँ आकर खड़ी रह जाती.
यासीर उस्मान ने एक काम बेहद शालीन ढंग से किया है कि उन्होंने रेखा के जीवन में आये किसी भी शख्स को उनके जीवन से जाने के लिए बेवजह दोषी नहीं ठहराया है. उस दौर में शायद परिवार और समाज का जो दवाब रहा हो, उसमे ये सबके वश में नहीं था कि कोई एक विवादस्पद आज और कल की गांठे थामे एक प्रेमिका का साथ दे सके. रेखा की अंत तक चली कोशिशें मन में एक सुईं चुभोती है, कि काश कोई हिम्मत करता, तो रेखा खुद को एक शख्स की परछाई के पीछे चुनवा नहीं देती..
“The fact that he is a married man doesn’t make any kind of a difference. A rose is a rose” – REKHA
“It is not the question of what does Jaya have that I don’t have. What does jaya have that I have?”- REKHA
“She made it clear that even if her lover decided to leave his wife, she wnt marry him. “I know the day he walks out on his wife, I will lose all respect for him. If he can do that to her who has given up all for him, it would be easier for him to walk out on me. That is why I dnt want to marry him. I will never marry him even if he asks me.”
“what do I deny? I am not in love with him? Of course I am. DUNIYA BHAR KA LOVE AAP LE LIJIYEGA AND ADD SOME MORE, I feel that for that person, bottom line.”
ये समझना कितना मुश्किल है कि रेखा ने ये सब बातें किसके लिए कहीं और क्यों? अपनी जिंदगी लगभग 4 दशक से रेखा ने जो लिबास ओढ़ लिया है, उसका एक एक धागा, एक एक रेशा खुद में कई राज़ समेटे हैं, और वो राज़ शायद सबसे ज्यादा कहे और सुने गए हैं, इसलिए वो सच में राज़ हैं ये तय करना भी हमारे आपके वश में नहीं. लेकिन हाँ यासीर उस्मान ने इस सबसे ज्यादा चर्चित कहानी की नायिका और बाकी हरेक किरदार के मन की अनकही बड़े ही सधे और साफ़ अंदाज़ में आपसे हमसे कह दी है, सिवाय इसके कि कहानी का नायक अब भी शायद पहले की तरह और आने वाले समय में भी कुछ न कहने की स्थिति में है, या शायद नकार कर बैठा है.
जिस कहानी को बिना किसी कलम स्याही किरदार और घटना दुर्घटना के आज तक भी हर कोई अपने ज़हन में लिखता पढता रहता है, उसके बारे में तीन चौथाई इस किताब को पढ़कर मालूम पड़ता है. जो एक चौथाई रह गया, वो कभी कहा नहीं जायेगा. पर कहानी तो थी, नायक भी था, और नायिका भी. बस परिस्थितियां पूरी तरह से खिलाफ थी, क्यूंकि समाज खिलाफ था.
यासीर उस्मान ने “दूसरी औरत” को पूरा सम्मान दिया है. उसी दूसरी औरत को जिसके पाले में न समाज था, न हालात, न बच्चे, न परिवार, न कानून, न मान्यताएं और न ही खुद वो शख्स जिसके लिए वो दूसरी औरत बनी थी. यासीर ने “शादी” के सम्बन्ध को वही सम्मान दिया है, जो इस समा

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