रेखा अमिताभ और वो अधूरी कहानी!








70 के दशक की बेबाक और बिंदास रेखा आज खुद के बनाए घेरे में कैद दिखती हैं. इसे आप रेखा की तरह एक "खूबसूरत" रहस्य कह सकते हैं, जिसमें तमाम अरमान, अधूरी ख्वाहिशें बंद हैं. जमाना उन ख्वाहिशों की दास्तान सुनना चाहता है, मगर रेखा अपनी जुबान बंद रखना ही पसंद करती हैं.
रेखा बतौर एक्ट्रेस शोहरत की बुलंदियों पर हैं, तो एक औरत के रूप में भी जिंदगी के ख्वाब सजाती हैं. ये बात अजीब है कि जिसकी अदाओं से दुनिया का दिल बहला, उसकी चाहतें कभी अपने लिए मुकम्मल नहीं हुईं. जो दिल के करीब थे- वो अपनी वजहों से साथ छोड़ते गए. तब रेखा ने खुद को बखूबी संभाला. इसकी गवाह 80 के दशक की तमाम फिल्में हैं- जो रेखा के नाम से चलीं. मगर जिंदगी...?
दूरियों से शुरू हुआ नजदीकियों का सिलसिला
अगर अमिताभ और रेखा की बात करें तो दोनों की जिंदगी में नजदीकियों का सिलसिला दरअसल दूरियों से शुरू होता है. 1973 में दोनों को 'मेला' नाम की एक फिल्म मिली थी. मगर, अमिताभ की नाकामियों का ट्रैक रिकार्ड देखते हुए निर्माता निर्देशक ने कुछ सीन शूट करने के बाद उन्हें फिल्म से हटा दिया. ये बात जब रेखा को पता चली, तो सीधे सादे और अपने आप में गुम रहने वाले अमिताभ से सहानुभूति हुई.
जया भादुड़ी को दीदी बोलती थीं रेखा
इसके बाद दोनों ने "नमकहराम" एक साथ की, लेकिन आमने-सामने का सीन सिर्फ एक था. हालांकि तब रेखा अमिताभ से पूरी तरह अंजान नहीं थी. बल्कि रेखा तो जया भादुड़ी के साथ अमिताभ के रिश्ते की हमराज थीं. जया और रेखा एक ही सोसायटी में रहती थीं और जया को दीदी कहती थीं. अमिताभ को वो जया के ब्वॉयफ्रेंड के रूप में जानती थीं. तब क्या पता था कि आगे चलकर रिश्तों का ये समीकरण ऐसे बदलेगा, कि एक साथ खड़े होना मुश्किल हो जाएगा...?


कभी खुलकर नहीं की रिश्ते पर बात
साल 1981 के आते-आते बात मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन भी हो गई. 7 साल का साथ तमाम सवालों के घेरे में खड़ा हो गया. इसका जवाब उस दौर में छपे रेखा के इंटरव्यू में तो साफ दिखता था. मगर अमिताभ उस रिश्ते को लेकर खामोश ही थे. वो जमाने के सामने बातों-मुलाकातों का वो सिलसिला अमिताभ और रेखा के लिए आखिरी साबित हुआ. रेखा और बच्चन परिवार के बीच दूरियां इस कदर बढ़ गईं, कि 2 साल बाद अमिताभ कुली के सेट पर हादसे का शिकार हुए, अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूझते रहे. लेकिन रेखा उनसे मिलने तक नहीं जा पाईं.
रेखा की जिंदगी में परफैक्ट मैन रूप में थी अमिताभ की जगह
बता दें कि अमिताभ की जगह रेखा जिंदगी में एक परफैक्ट मैन के रूप में रही. ये बात रेखा भी मानती है.  अमिताभ के साथ काम के दौरान बढ़ी नजदीकियों ने उन्हें खुद को लेकर गंभीर होना सिखाया. सावन भादो की सांवली सलोनी जो रेखा, सिल्वर स्क्रीन की डीवा के रूप में उभरी, उसकी प्रेरणा अमिताभ की सोहबत में ही मिली. रेगुलर जिम जाने से लेकर तली-भुनी चीजों से सख्त परहेज तक, सब कुछ रेखा की जिंदगी में आसानी से होने लगा.


CONVERSATION

0 comments:

Post a comment